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कृषि विभाग के महत्वपूर्ण कार्यक्रम-2021-22

हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रदेश के 90 प्रतिशत लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं तथा 70 प्रतिशत लोग सीधे तौर पर कृषि पर निर्भर है। राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि व इससे जुड़े क्षेत्रों का लगभग 13.62 प्रतिशत योगदान है। प्रदेश में 9.97 लाख किसान परिवार हैं तथा 9.44 लाख हैक्टेयर भूमि पर काश्त होती है तथा औसतन जोत का आकार लगभग 0.95 हैक्टेयर है। प्रदेश में 88.86 प्रतिशत किसान सीमान्त तथा लघु वर्ग के हैं जिनके पास बोई जाने वाली भूमि का 55.93 प्रतिशत भाग है। 10.84 प्रतिशत किसान मध्यम श्रेणी से हैं। केवल 0.30 प्रतिशत किसान ही बड़े किसानों की श्रेणी में आते हैं। प्रदेश की कृषि जलवायु नकदी फसलों के उत्पादन हेतु अति उत्तम है।

• वर्ष 2021-22 में सरकार द्वारा कृषि के विकास हेतु 642.47 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया है ।राज्य प्रायोजित योजनाएं:

• ”फसल विविधिकरण प्रोत्साहन परियोजना” (JICA EAP)

प्रदेश में कृषि विविधिकरण को और बढावा देने हेतु ”321 करोड़ रूपये की हिमाचल प्रदेश फसल विविधिकरण प्रोत्साहन परियोजना“ जापान इन्टरनेशनल कोआपरेशन एजेंसी (JICA) के सहयोग से जून, 2011 से लागू की गई थी। इस परियोजना को प्रदेश के पाँच जिलों क्रमशः बिलासपुर, हमीरपुर, मंडी, कांगड़ा व ऊना में योजनाबद्ध तरीके से 2020 तक कार्यान्वित किया गया। इसके अन्तर्गत सिंचाई सुविधाएं, फार्म तक सड़क मार्ग, किसानों के समूह गठित कर सब्जी उत्पादन व विपणन हेतु तकनीकी जानकारी उपलब्ध करवाना, परियोजना क्षेत्र में कार्यरत कृषि अधिकारियों को प्रशिक्षण आदि द्वारा सब्जी उत्पादन व फसल विविधिकरण को बढ़ावा देना शामिल रहा । परियोजना के अन्तर्गत 210 लघु सिंचाई योजनाऐं, 29.40 कि0मी0 सम्पर्क मार्ग, 23 कलैक्शन सैंटर बनाये गये।

जाईका चरण-II

परियोजना की सैधान्तिक स्वीकृति जाईका टोकियो द्वारा अप्रैल 2020 में कर दी गई है जिसका क्रियान्वयन जाईका मिशन द्वारा किया जायेगा। 26-03-2021 को भारत सरकार व जापान सरकार द्वारा इस परियोजना का सहमति पत्र हस्ताक्षरित कर दिया गया है। यह परियोजना प्रदेश के सभी जिलों में कार्यान्वित की जायेगी । परियोजना के अन्तर्गत 1013 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है तथा इसे अगले नौ वर्षों 2021 से 2029-30 तक कार्यान्वित किया जायेगा। परियोजना का संचालन हिमाचल प्रदेश एग्रीकल्चर डेवेल्पमेंन्ट सोसाईटी कर रही है जिसका गर्वनिंग बोर्ड है तथा इसके अध्यक्ष कृषि मन्त्री हैं और एग्जीक्यूटिव कमेटी के अध्यक्ष सचिव (कृषि) है। इस परियोजना का मुख्यालय हमीरपुर में है।

“मुख्यमन्त्री नूतन पालीहाउस परियोजना”

प्रदेश सरकार ने वर्ष 2019-20 से 150 करोड़ रूपये की ”मुख्यमन्त्री नूतन पालीहाउस परियोजना’ प्रस्तावित की है, जिसके अन्तर्गत 5000 पॉलीहाउस बनाए जायेंगे। इस परियोजना को दो चरणों में कार्यान्वित किया जायेगा। प्रथम चरण की अवधि तीन वर्षों (2020-21 से 2022-23) तक होगी और इस पर 78.57 करोड़ रु. खर्च किये जायेंगे। प्रथम चरण में 2522 पॉलीहाउस बनाए जायेंगे। इस योजना में किसानों को पॉलीहाउस व इसके अन्दर सूक्ष्म सिंचाई लगाने पर 85 प्रतिशत उपदान उपलब्ध है। इस परियोजना को नाबार्ड द्वारा वित्तीय सहायता हेतु मार्च, 2020 में स्वीकृति दे दी गयी है। इस वर्ष इस परियोजना पर 22 करोड़ रूपये खर्च किये जायेंगे और 750 पॉलीहाउस बनाये जायेंगे। जिसके लिए सेवा प्रदाओं को पंजीकृत करने हेतु निविदा प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है और जिलावार लक्ष्य निर्धारित कर दिये गये हैं व बजट भी आवंटित कर दिया गया है।

• “मुख्यमन्त्री ग्रीनहाउस नवीकरण योजना”

प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017-18 से पॉलीहाउस के अंतर्गत पॉलीशीट को बदलने हेतु मुख्यमंत्री ग्रीनहाउस नवीकरण योजना आरम्भ की है। इस योजना के अंतर्गत 5 वर्ष पश्चात या प्राकृतिक आपदा से क्षतिग्रस्त होने पर पॉलीशीट को बदलने हेतु प्रदेश सरकार द्वारा 70 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। वर्ष 2021-22 के लिए इस योजना पर 1 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है।

• “सूक्ष्म सिंचाई के माध्यम से कुशल सिंचाई योजना “

इस योजना का मुख्य उदेश्य पानी के उचित उपयोग से राज्य में कृषि समुदाय को कुशल एवं आश्वासित सिंचाई सुविधा प्रदान करना है। प्रदेश में सूक्ष्म सिंचाई जैसे स्प्रिंकलर / ड्रिप को प्रोत्साहन दिया जा रहा है तथा इस परियोजना के माध्यम से 8,500 हैक्टेयर क्षेत्र को टपक/फुव्वारा सिंचाई प्रणाली के तहत् लाया जायेगा व 14 हजार किसानों को लाभान्वित किया जाएगा जिस के लिए इस योजना के अन्तर्गत कुल 154 करोड़ रूपये का प्रावधान रखा गया है। इस योजना के अन्तर्गत सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली की स्थापना पर 80 प्रतिशत उपदान है। इस वर्ष योजना के लिए 33 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है।

• “मुख्यमन्त्री किसान एवं खेतीहर मजद़ूर जीवन सुरक्षा योजना”

कृषि मशीनरी के प्रयोग के दौरान किसानों तथा खेतीहर मज़दूरों के घायल होने अथवा उनकी मृत्यु होने की सूरत में सहायता प्रदान करने के उदेश्य से सरकार द्वारा “मुख्यमन्त्री किसान एवं खेतीहर मजद़ूर जीवन सुरक्षा योजना” नामक एक योजना आरम्भ की है। इसमें मृत्यु होने पर सहायता के रूप में 3.0 लाख रू0, स्थाई रूप से अपंग होने पर 1.0 लाख रू0 तथा आंशिक स्थाई अपंग होने पर प्रभावित को सहायता के रूप में 10,000 से 40,000 रू0 तक की सहायता प्रदान की जाएगी। इस वर्ष 2021-2022 के लिए इस योजना पर 40 लाख रूपये का प्रावधान रखा गया है । अब तक इस योजना पर वर्ष 2015-16 से 118 किसानों को 52.20 लाख रूपये सहायता के रूप में दिये गये।

• “मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना “

प्रदेश में बन्दरों एवं जंगली जानवरों से फसलों को काफी नुक्सान पहुंच रहा है। इसी के बचाव के लिए प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना आरम्भ की है। इस योजना के अन्तर्गत कृषकों को सौर ऊर्जा चलित बाड़ लगाने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर 80 प्रतिशत व समूह आधारित बाड़ बन्दी के लिए 85 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है। बाड़ को सौर उर्जा से संचारित किया जा रहा है। बाड़ में विद्युत प्रवाह से आवारा पशुओं, जंगली जानवरों एवं बन्दरों को दूर रखने में मदद मिलेगी। वर्ष 2020-21 में इस योजना पर 38.09 करोड़ रूपये खर्च किये गऐ और 1369 किसान लाभान्वित हुए। सरकार ने किसानों की माँग तथा सुझावों को देखते हुए, (1) कांटेदार तार अथवा चेनलिंक बाड़ लगाने के लिये 50 प्रतिशत उपदान (2) क्ंपोजिट बाड़ लगाने के लिए 70 प्रतिशत उपदान का प्रावधान किया गया है। इस वर्ष योजना के लिए 40 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है।

• “उत्तम चारा उत्पादन योजना”

राज्य में चारे का उत्पादन बढ़ाने के लिये सरकार ने “उत्तम चारा उत्पादन योजना” आरम्भ की है। किसानों को उपदान दरों पर चारा घास के गुणवत्तायुक्त बीज, कलम तथा स्तरोन्नत चारा किस्मों की पौध उपलब्ध करवाई जा रही है। विभाग चरी, बाजरा, जई, बरसीम, मक्खन घास व चारा मक्की के बीज पर सभी किसानों को 50 प्रतिशत तक का अनुदान दे रही है। किसानों के लिये चारा काटने की मशीन (टोका मशीन) एक महत्त्वपूर्ण उपकरण है। सरकार अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और बीपीएल किसानों को चारा काटने की मशीन पर 50 प्रतिशत उपदान की सुविधा दे रही है। प्रदेश सरकार किसानों को अजोला घास की खेती करने को भी प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए सरकार किसानों को पिट बनाने के लिए 50 प्रतिशत उपदान दे रही है। इस योजना के अंतर्गत इस वर्ष 5.60 करोड़ रूपये खर्च किये जा रहे है। गत वर्ष 2020-21 मे इस योजना के अंतर्गत 7.36 करोड़ रूपये खर्च किये गऐ।

• ”उठाऊ सिंचाई योजना का निर्माण एवं बोरवैल योजना”

प्रदेश के उन क्षेत्रों में जहाँ सिंचाई के लिए सतही जल स्त्रोत कृषि -जोतों से गहरे स्थानों में उपलब्ध है का उपयोग करने के लिए व्यक्तिगत स्तर की लघु/मध्यम उठाऊ सिंचाई योजनाऐं बनाई जाती है तथा जहाँ सिंचाई के लिए सतही जल स्त्रोत उपलब्ध नहीं है एवं भूमिगत पानी सम्भावित हो, ऐसे स्थानों पर विभाग किसानों को कृषि सिंचाई की पूर्ति के लिए व्यक्तिगत बोरवैल स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करता है। जो भी व्यक्ति अथवा किसान समूह, उठाऊ सिंचाई योजना का निर्माण एवं बोरवैल स्थापित करता है तो उन्हें 50 प्रतिशत उपदान दिया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत जल संग्रहण टैंक, सिप्रक्ंलर तथा पानी के पाईप भी उपलब्ध करवाये जा रहे हैं। इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2020-21 में 9.60 करोड़ रूपये खर्च किये गये और 907 हैक्टेयर क्षेत्र इसके अन्तर्गत लाया गया और 1935 किसान लाभान्वित हुए । इस वर्ष योजना का समापन कर इसे प्रवाह सिंचाई योजना में विलीन कर दिया गया है।

• “कृषि विपणन”

मार्किटिंग की सुविधा हर किसान के घर-द्वार पहुंचे इसके लिए जगह-जगह छोटे सब्जी संग्रहण केन्द्र व मार्किट यार्ड बनाए जा रहे हैं। प्रदेश में कृषि विपणन कार्य हेतु कृषि विपणन बोर्ड राज्य स्तर पर बनाया गया है जिसके अन्तर्गत जिला स्तर पर कुल 10 मण्डिया कार्यरत है तथा 53 उप मण्डिया वर्तमान में किसानों को विपणन सुविधा प्रदान कर रही है। वर्तमान सरकार मण्डियों व कोल्ड स्टोर के माध्यम से विपणन को बढ़ावा दे रही है। गत वर्ष 2020-21 में मण्डियों पर 10 करोड़ रु. खर्च किये गये। प्रदेश में अभी तक ई पोर्टल के अंतर्गत 19 मण्डिया कार्यरत है और 10 मण्डिया इस पोर्टल के माध्यम से जोड़ी जायेगी। इस योजना के अन्तर्गत प्रदेश सरकार द्वारा समय- समय पर मण्डियों के निर्माण व अन्य खर्चों हेतु सहायता अनुदान दिया जाता है।

• “चाय व कॉफ़ी की खेती”

चाय व कॉफ़ी महत्वपूर्ण पेय है जो कि पूरे संसार में प्रचलित है। प्रदेश में चाय की खेती जिला कांगड़ा के धौलाधार बोटेनिकल गाडर्न वर्ष 1849 से की जा रही है। प्रदेश में चाय की खेती के अन्तर्गत 2315 हैक्टेयर भूमि है। विभाग के तकनीकी अधिकारी द्वारा कृषकों के लिए निम्न योजनाएं कायान्वित की जा रही है।

1. कृषकों को सुधरी किस्मों के पौधों का वितरण

2. प्रदर्शन प्लाटों की योजना

3. प्रदर्शन -भ्रमण

4. ‘‘खाद पर उपदान’’

राज्य सरकार मिश्रित खादों जैसे डी.ए.पी.18:46:0, इफको-एन.पी.के.12:32:16 और 10:26:26 व आर.सी.एफ.-एन.पी.के.15:15:15 की कीमत पर 1000 रूपये प्रति मिट्रिक टन उपदान दे रही है। इस योजना के अन्तर्गत 1.45 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है।

• “अच्छी गुणवत्तायुक्त बीजों का गुणन एवं उनका वितरण”

विभाग के अपने 36 बीज गुणन प्रक्षेत्र है जहां पर कि रबी और खरीफ के फसलों का आधार बीज तैयार किया जाता है। इन बीज फार्मों में अनाज, दालों और सब्जियों का लगभग 3500 से 4000 क्विंटल बीज प्रतिवर्ष तैयार किया जाता है। इसके अतिरिक्त विभाग द्वारा विभिन्न फसलों के 92,000 क्विंटल प्रमाणित बीज राज्य के किसानों को वितरित किये जाते हैं।

• “पौध संरक्षण”

• ‘‘जल से कृषि को बल योजना“

विभाग इस कार्यक्रम के अन्तर्गत फसलों में लगने वाली बिमारियों में तथा कीटों के प्रकोप की स्थिति पर लगातार निगरानी रखता है। शिमला में प्रदेशिक कीटनाशक परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित की गई है जो कि अपनी क्षमता के अनुसार प्रति वर्ष 500 नमूनों की जांच करती है। इसके अतिरिक्त जैविक विधि से कीट नियन्त्रण करने के उदेश्य से एक जैव नियंत्रक प्रयोगशाला तथा जैविक कीटनाशक प्रयोगशाला पालमपुर में स्थापित की गई है जहां संरक्षण कीट स्थिति वृद्धि, पालन और जैव एजेंटों और प्रसार कर्मियों और किसानों के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है तथा जैव नियन्त्रक एजेंट तैयार किए जाते हैं।

• “गुणवत्ता नियंत्रण”

इस योजना के तहत बीज, खाद और कीटनाशकों पर विभिन्न अधिनियमों के अन्तर्गत गुणवता नियन्त्रण का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाता है। इसके लिए प्रदेश में गुणवत्ता नियंत्रण अधिकारियों को अधिसूचित किया गया है। विभाग के द्वारा तीन उर्वरक प्रयोगशालाएं हमीरपुर, सुन्दरनगर व शिमला में और तीन बीज परीक्षण प्रयोगशालाएं सोलन, पालमपुर और मण्डी में तथा कीटनाशक प्रयोगशाला शिमला में कार्यरत है। इनमें 2000 उर्वरक के नमूने, 300 कीटनाशक और 700 बीज के नमूने का प्रतिवर्ष का विश्लेषण किया जा रहा है।

• ”प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना”

प्रदेश सरकार ने वर्ष 2018-19 से प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने हेतु प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना आरम्भ की है। इसके अन्तर्गत फसल उत्पादन लागत को कम किया जा सकेगा। प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए निम्नलिखित पग उठाएं जा रहे हैः-

• कृषकों तथा कृषि, बागवानी तथा पशुपालन विभाग के विस्तार अधिकारियों को इस नई प्रणाली के बारे में अवगत कराने हेतु विस्तृत जागरूकता कार्यक्रम किए जा रहे हैं।

• विश्वविद्यालयों द्वारा इस के लिए Package of Practices तैयार किए जाएंगे ।

• रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग को हतोत्साहित किया जा रहा है।

• गौशालाओं को पक्का करने व गोमूत्र और गोबर इकट्ठा करने के लिए गौशाला बदलाव हेतु 80 प्रतिशत उपदान ( अधिकतम 8000 रूपये प्रति प्राकृतिक खेती किसान के लिये) दिए जा रहे हैं।

• प्राकृतिक खेती में प्रयोग होंने वाले आदान बनाने के लिए किसानों को ड्रमों पर 75 प्रतिशत उपदान (अधिकतम 750/- प्रति ड्रम एवं अधिकतम 3 ड्रम/प्राकृतिक खेती किसान परिवार के लिए) दिए जा रहे हैं।

• इस योजना के अन्तर्गत देसी गाय के गोबर व गौमूत्र और कुछ स्थानीय वनस्पतियों के घोल को रासायनिक कीटनाशकों के स्थान पर फसलों में छिड़काव हेतु प्रयोग में लिया जा रहा है।

• देसी गाय पर 50 प्रतिशत उपदान और अधिकतम 25000/- रूपये की उपदान का प्रावधान है तथा उसके परिवहन के लिए 5 हजार अतिरिक्त दिए जा रहे हैं।

• प्राकृतिक खेती में काम आने वाले आदानों की आपूर्ति हेतु प्रत्येक गाँव में प्राकृतिक खेती संसाधन भण्डार खोलने के लिये 10,000/- रूपये तक की सहायता राशि प्रदान करने का प्रावधान है।

• योजना के अन्तर्गत कृषकों को आवश्यक प्रशिक्षण व उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

प्रदेश के 9.61 लाख किसान परिवारों को चरणवद्ध प्रणाली से 2018 से 2022 तक समस्त किसान/ बागवान/चाय बागवान इस विधि से जोड़ दिये जाएगें। इस योजना के अंतर्गत अब तक 1,16,826 किसानों द्वारा 6377 हैक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती पद्वति से खेती-बाड़ी करना शुरू कर दिया गया है। वर्ष 2021-22 में 50000 अतिरिक्त किसानों को इसके अन्तर्गत लाने का लक्ष्य रखा गया है और 12000 हैक्टेयर क्षेत्र को प्राकृतिक खेती के अधीन लाया जायेगा। इसके अतिरिक्त इस वर्ष 1 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रेरित किया जायेगा।

• ”जल से कृषि को बल योजना”

इस योजना के अन्तर्गत प्रदेश में उपयुक्त स्थलों पर चैकडैम एवं तालाबों का निर्माण किया जायेगा उनमें एकत्रित जल को किसान व्यक्तिगत लघु उठाऊ सिंचाई योजनाऐं या बहाव सिंचाई योजनाऐं (जैसा अपेक्षित हो) बनाकर सिंचाई के लिए पानी उपयोग कर सकते हैं। इस योजना के अंतर्गत 5 वर्षों के लिए 250 करोड़ रूपये तथा इस वर्ष 25.00 करोड़ रूपये खर्च किये जाएंगे। वर्ष 2020-21 में 24.55 करोड़ रूपये खर्च किये गये और 156 जल निकायों का निमार्ण किया गया जबकि 107.73 हैक्टेयर क्षेत्र में नई सिंचाई क्षमताओं का सृजन किया गया तथा 388 किसानों को लाभान्वित किया गया है। योजना के अन्तर्गत सामुदायिक लघु जल संचयन योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए शत-प्रतिशत व्यय सरकार द्वारा वहन किया जायेगा।

• ‘‘प्रवाह सिंचाई योजना“

इस योजना के अन्तर्गत प्रदेश में कूहलों के स्त्रोतों का नवीनीकरण तथा सामुदायिक क्षेत्रों में कूहलों को सुदृढ़ करने का कार्य किया जा रहा है। योजना के अन्तर्गत सभी सामुदायिक कार्यों के लिए शत-प्रतिशत व्यय सरकार द्वारा वहन किया जायेगा। योजना के अन्तर्गत व्यकितगत स्तर पर बोरवैल और उथले कुओं के निर्माण पर 50 प्रतिशत की सहायता का प्रावधान है। योजना के अन्तर्गत 5 वर्षों के लिए 150 करोड़ रूपये तथा इस वर्ष 15.00 करोड़ रूपये खर्च किये जाएंगे। गत वर्ष इस योजना के अन्तर्गत 14.76 करोड़ रूपये खर्च किये गये तथा 422 हैक्टेयर क्षेत्र को कवर किया गया व 683 किसानों को लाभान्वित किया गया।

• “राज्य कृषि यंत्रीकरण कार्यक्रम”

प्रदेश में कृषि अभियान्त्रिकी को बढ़ावा देने तथा पहाड़ी खेती के मशीनीकरण हेतु राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2018-19 से एक नई योजना “राज्य कृषि यंत्रीकरण कार्यक्रम” लागू की गई है। विभाग द्वारा इस योजना के अन्तर्गत प्रदेश के किसानों को बड़े स्तर पर पावर टिलर व पावर वीडर इत्यादि उपदान पर उपलब्ध करवाये जा रहे हैं। योजना के अन्तर्गत वित्त वर्ष 2020-21 में 8 हार्स पावर या इससे अधिक क्षमता के पावर टिलर पर 50 प्रतिशत उपदान अधिकतम सीमा 85 हजार रुपये तथा पावर वीडर पर 50 प्रतिशत उपदान अधिकतम सीमा 25 हजार रुपये उपदान के रुप में उपलब्ध कराये जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेश के बेरोजगार युवाओं व सहकारी सभाओं को कृषि उपकरण सुविधा केन्द्र (Custom Hiring Centre) स्थापित करने हेतू 40 प्रतिशत उपदान का प्रावधान रखा गया है ताकि प्रदेश के गरीब किसान व वागवान इन केन्द्रों से किराये पर उपकरण हासिल कर सकें। इस योजना के क्रियान्वयन हेतू प्रदेश सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2021-22 हेतू 15 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान रखा गया है।

• कृषि कोष:-

कृषक उत्पादक संगठन किसानों, बागवानों, दुग्ध उत्पादकों, मछुआरों आदि प्राथमिक उत्पादकों के निकाय हैं। किसान व बागवान संसाधन जुटाने में प्रायः असफल रहते हैं। उन्हें फसल बुवाई से कटाई तक तथा कटाई के बाद ग्रेडिन्ग और पैकेजिंग मशीनों, परिवहन, भण्डारण, गोदाम और पैक हाऊस जैसे बुनियादी ढाँचे तथा अन्य आदानों की आवश्यकता होती है जिस के लिए दीर्घकालिक पूंजी की जरूरत रहती है। इसको ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने इस वर्ष 5 करोड़ रुपये का कृषि कोष बनाने का प्रावधान किया है जिससे कृषक उत्पादक संगठन किसानों को Seed Money, बैंक ऋण पर उपदान और क्रेडिट गारंटी कवर प्रदान किया जाएगा। इस के लिए सरकार द्वारा विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार किए गये हैं।

“कृषि से संपन्नता योजना” (हींग व केसर की खेती)

Institute of Himalayan Bio Technology (IHBT), पालमपुर द्वारा हींग की एक नई प्रजाती की पहचान की गई है जो कि चम्बा, लाहौल-स्पिति और किन्नौर जिलों की उंचाई वाले क्षेत्रों में उगाई जा सकती है। इसी तरह कुछ क्षेत्रों में केसर की खेती के लिए अनुकूल जलवायु एवं वातावरण पाया गया है। इन दोनों की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने इस वर्ष से कृषि संपन्नता योजना प्रस्तावित की है। इस योजना को क्रियान्वित करने हेतु विभाग द्वारा विस्तृत कार्य योजना तैयार कर ली गई है। इसके अन्तर्गत 6 जून, 2020 को IHBT के साथ एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित कर लिया गया है। योजना के अन्तर्गत हींग व केसर की खेती की शुरूआत करना व प्रगतिशील किसानों के खेतों में हींग व केसर की फसलों के प्रदर्शन लगाना शामिल है। इसके साथ-साथ अधिकारियों व किसानों को इस खेती की विधि की व्यापक जानकारी देने के लिए प्रशिक्षणों का प्रावधान भी है। चिन्हित जिलों में हींग व केसर के Demonstration रबी सीजन में लगा दिये हैं जिसका समय- समय पर निरीक्षण किया जा रहा है। योजना के अन्तर्गत गत वर्ष 96.60 लाख रुपये खर्च किये गये व इस वर्ष 2021-22 हेतू 3 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान रखा गया है।

• “कृषि उत्पादन संरक्षण योजना” (एन्टी हेल नेटस) 2020-21

यह योजना प्रदेश में वर्ष 2020-21 से कार्यान्वित की जा रहा है।इस योजना के अन्तर्गत फसलों को ओलावृष्टि से बचाने हेतू राज्य सरकार द्वारा किसानों को एन्टी हेल नेटस की खरीद पर 80 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध करवाया जायेगा। प्रदेश के सभी सब्जी उत्पादक किसानों को उनकी फसलों को प्राकृतिक आपदा से बचाने के लिए एन्टी हैल नैटस उपलब्ध करवाये जाने है ताकि फसलों को ओलावृष्टि से बचाया जा सके। प्रदेश में किसानों को एन्टी हैल नैटस खरीदने के लिए सरकार द्वारा इस वर्ष 10 करोड रूपये का वित्त्तीय प्रावधान किया गया है तथा पात्र किसानों को 28 रूपये प्रति वर्ग मीटर की दर से अनुदान उपलब्ध करवाया जायेगा, जिसमें अधिकतम 5 हजार वर्ग मीटर के लिए पात्र किसान इस योजना के अन्तर्गत लाभ ले सकतें हैं।

केन्द्र प्रायोजित योजनाएं:

• “प्रधानमन्त्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान योजना” (पी.एम.कुसुम योजना)

सरकार ने किसानों को आश्वस्त सिंचाई प्रदान करने हेतू विशेषकर दूरस्थ इलाकों में जहां बिजली की निरतंर आपूर्ति रहे वहां जल उठाने के लिए “प्रधानमन्त्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान योजना” (पी.एम.कुसुम योजना) नामक योजना आरम्भ की है, ताकि फसलों के उत्पादन व उत्पादकता में वृद्धि हो सके। इस योजना के अन्तर्गत प्रदेश में सौर पम्पों से खेती-सिंचाई के लिए जल उठाने हेतु आवश्यक अधोसंरचना स्थापित करना प्रस्तावित है। योजना के अन्तर्गत सौर पम्पों से सिंचाई हेतु व्यक्तिगत व सामुदायिक स्तर पर लघु व सीमान्त वर्ग के किसानों के लिए पंपिंग मशीनरी लगाने हेतु 85 प्रतिशत की सहायता तथा मध्यम व बड़े वर्ग के किसानों के लिए 80 प्रतिशत की सहायता का प्रावधान है। इस वर्ष योजना के लिए 7.51 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है। तथा 750 सौर पम्प लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। गत वर्ष योजना के अन्तर्गत 1.50 करोड़ रूपये खर्च किये गये तथा 85 सौर पम्प लगाये गये।

• ‘“राष्ट्रीय कृषि विकास योजना” (केन्द्रीय हिस्सा : राज्य हिस्सा 90:10)

कृषि व सम्बद्ध क्षेत्रों में 4 प्रतिशत की विकास दर प्राप्त करने के लिये “राष्ट्रीय कृषि विकास योजना” लागू की गई है। इस योजना के मुख्य उदेश्य हैः राज्यों को कृषि व सम्बद्ध क्षेत्रों में निवेश हेतु प्रोत्साहित करना, कृषि कार्यक्रमों की योजना बनाने व लागू करने की प्रक्रिया में राज्यों को छूट देना, कृषि जलवायु, तकनीक व प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता के अनुसार जिले व राज्यों की कृषि योजनाओं को बनाना, यह भी सुनिश्चित करना कि ये योजनायें स्थानीय जरूरतों/ फसलों/ प्राथमिकताओं को देखकर बनाई गई है, कृषि व सम्बद्ध क्षेत्रों से किसानो की आय को बढ़ाना, इन क्षेत्रों के उत्पादन तथा उत्पादकता में भरपूर परिवर्तन आदि। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रदेश में पहली बार “जिला कृषि योजनायें” तैयार की गई है तथा साथ में राज्य कृषि योजना भी बनाई गई हैं ताकि योजनाबद्ध तरीके से कृषि का समग्र विकास किया जा सके। कृषि विकास की प्राथमिकताऐं भी निर्धारित की गई हैं। इस कार्य में कृषि विभाग के अलावा बागवानी, पशुपालन व मत्स्य विभाग भी शामिल हैं। वर्ष 2021-22 में 25.944 करोड़ रूपये की परियोजनायें स्वीकृत हुई हैं।

• “राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अभियान” (केन्द्रीय हिस्सा:राज्य हिस्सा 90:10)

प्रदेश में धान, मक्की, दालों, गेहूं और पोशक अनाजों (Nutri-cereals) का उत्पादन व उत्पादकता बढ़ाने के लिए “राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अभियान” आरम्भ किया गया है। इस अभियान के अंतर्गत धान, गेहूँ, दालों, मक्की व पोषक अनाजों का उत्पादन बढा़ने हेतू सहायता दी जा रही है। 2021-22 में 907 लारव रूपये का प्रावधान किया गया है। इसमें धान के लिए 47.025 लारव रूपये, गेहूँ के लिए 293.026 लारव रूपये, मक्की के लिए 241.00 लारव रूपये, दालों के लिए 232.9185 लारव रूपये व पोशक अनाजों के लिए 93.03 लारव रूपये का प्रावधान किया गया है। इस में धान के लिए कांगड़ा, मंडी व गेहूँ के लिए 11 जिले (शिमला को छोड़कर) शामिल है। मक्की के लिए 9 जिले (शिमला, किन्नौर व लाहौल को छोड़कर) शामिल है। शिमला जिले कों क्लस्टर प्रर्दशन की उपलब्धता न होने के कारण गेंहू व मक्की के अंतर्गत शामिल नहीं किया गया है। इसके अलावा माश, चना, मटर, मसूर व मूंग की दलहनी फसलों के लिए सभी जिले शामिल हैं। पोषक अनाजों (ज्वार, बाजरा, कोदोमिल्ट, प्रोसोमिल्ट, फोक्सटेलमिल्ट {कंगनी}, लिटलमिल्ट {सावण}, फिंगरमिल्ट {रागी,मंडुआ}, बार्नर्याडमिल्ट ) के लिए सभी जिलें शामिल है। इसके अन्तर्गत क्लस्टर प्रर्दशन क्षेत्र, मशीनरी, बीज, सूक्ष्म तत्व, पौध संरक्षण इत्यादि पर सहायता दी जा रही है ताकि धान, गेहूँ, दालों, मक्की व पोषक अनाजों की पैदावार बढ़ाई जा सके। इस कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2020-21 में 12.48 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया । इसमें धान के लिए 0.79 करोड़ रूपये, गेहूँ के लिए 5.45 करोड़ रूपये, मक्की के लिए 2.63 करोड़ रूपये, दालों के लिए 1.33 करोड़ रूपये व पोषक अनाजों के लिए 0.75 करोड़ रूपये खर्च किये गये ।

• “राज्य प्रसार कार्यक्रमों में प्रसार सुधार हेतु समर्थन /आत्मा कार्यक्रम” (केन्द्रीय हिस्सा:राज्य हिस्सा 90:10)

कृषि की नवीनतम तकनीक के प्रसार व प्रचार हेतु सभी जिलों में ‘”आत्मा कार्यक्रम” शुरु किया गया है। इस योजना के अंतर्गत गत वर्ष 19.66 करोड़ रूपये खर्च किये गये । कृषि विभाग के अलावा किसानों से जुड़े दूसरे विभाग जैसे उद्यान, पशुपालन, मत्स्य व कृषि/बागवानी विश्वविद्यालय भी इस कार्यक्रम में सहयोगी है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत खंड स्तर पर किसान समूह, स्वंय सहायता समूह व किसान संगठन गठित किये गये हैं। इस योजना के अन्तर्गत हर वर्ष सभी जिलों की कार्य योजनाऐं बनाई जाती है तथा कार्य योजनाओं को चलाने के लिये धन उपलब्ध करवाया जा रहा है। ब्लाक स्तर पर कृषक सलाहकार समिति बनाई जाती है। उत्कृष्ट किसानों में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने व उत्पादन बढ़ाने हेतु विभिन्न स्तरों पर उत्कृष्ट किसानों को पुरस्कार भी दिए जा रहे हैं। इस योजना के अंतर्गत इस वर्ष 22.22 करोड़ रूपये खर्च किये जाएंगे।

• “राष्ट्रीय सतत खेती मिशन” (केन्द्रीय हिस्सा:राज्य हिस्सा 90:10)

प्राकृतिक संसाधनो के संरक्षण के साथ-साथ बारानी क्षेत्रों का विकास प्रदेश में अन्न उत्पादन की बढती हुई मांग को पूरा करने की एक कुंजी है इसके लिए केन्द्र सरकार ने वर्ष 2014-15 से कृषि उत्पादकता को विशेषतः बारानी क्षेत्रों में बढ़ाने के लिए “टिकाऊ खेती हेतु राष्ट्रीय मिशन” आरम्भ किया है। इस अभियान के अंतर्गत बारानी क्षेत्रों का विकास, मुल्यसंवर्धन एंव कृषि विकास गतिविधियां, जलवायु प्रबन्धन व टिकाउ कृषि जैसे उप कार्यक्रम शामिल है। वर्ष 2021-22 में बारानी क्षेत्रों के विकास हेतु 8.89 करोड़ रूपये की योजना भारत सरकार को स्वीकृति हेतु भेजी है जिसके अन्तर्गत 2736 हैक्टेयर बारानी क्षेत्रों का विकास किया जायेगा।

• “मिट्टी परीक्षण”(केन्द्रीय हिस्सा:राज्य हिस्सा 90:10)

कृषि उत्पादन बढ़ाने व भूमि की उपयोगिता जानने हेतु “मिट्टी परीक्षण” का बहुत महत्व है। विभाग निःशुल्क मिट्टी परीक्षण सुविधा किसानों को उपलब्ध करा रहा है ताकि किसान अपने खेतों की मिट्टी की जांच की सिफारिशों को अपनाकर कृषि उत्पादन में वृद्वि कर सके। इसके लिए प्रदेश में 9 स्वचालित मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं, 11 अचल मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं व 47 मिनी प्रयोगशालाओं की सुविधा उपलब्ध है। मिट्टी स्वास्थ्य जांच को सर्विस गारन्टी अधिनियम के अन्तर्गत लाया गया है ताकि किसानों को तय अवधि में रिपोर्ट मिल सके। भारत सरकार ने किसानों को मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड वितरित करने हेतु योजना आरम्भ की है जिसके अन्तर्गत GPS के आधार पर किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने लिए जा रहे हैं तथा उनका परीक्षण सभी पोषक तत्वों के लिए विभाग की मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं में किया जा रहा है।

• “प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना” (केन्द्रीय हिस्सा:राज्य हिस्सा 90:10)

भारत सरकार ने वर्ष 2015 से खेत में पानी की पहुँच का सही उपयोग बढाने के लिए और सुनिश्चित सिंचाई के तहत कृषि क्षेत्र का विस्तार करने के उदेश्य से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना को आरंभ किया है। इस योजना में प्रति बूंद अधिक फसल का उत्पादन करके ग्रामीण क्षेत्र में समृद्वि लाने का लक्ष्य हैं। इस योजना के अन्तर्गत सिंचाई में निवेश में एकरूपता लाना, ‘हर खेत कों पानी’ के तहत कृषि योग्य क्षेत्र का विस्तार करने के लिए, खेतों में ही जल को इस्तेमाल करने की दक्षता को बढ़ाना ताकि पानी के अपव्यय को कम किया जा सके, सही सिंचाई और पानी को बचाने की तकनीक को अपनाना ( हर बूंद अधिक फसल ) आदि इस योजना के मुख्य उदेश्य हैं। इस योजना के अंतर्गत गत वर्ष 620 किसानों को 6.67 करोड़ रूपये खर्च कर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करवाई गई तथा 229.96 है0 क्षेत्र इसके अन्तर्गत लाया गया।

• “कृषि सूचना” (100% केन्द्रीय हिस्सा)

जन संपर्क के माध्यमों से कृषि प्रसार एवं विस्तार हेतु एक अन्य योजना भी शुरु की गई है। इसके अन्तर्गत दूरदर्शन व रेडियो द्वारा कृषि प्रसार करना है। वर्तमान में दूरदर्शन द्वारा प्रसारित “कृषि दर्शन” कार्यक्रम के अलावा क्षेत्रीय व राष्ट्रीय कृषि कार्यक्रम पर जोर दे रहा है। आकाशवाणी द्वारा एफ. एम. ट्रांसमीटरों से क्षेत्र विशेष हेतु सप्ताह में 6 दिन 30 मिनट के कार्यक्रम प्रस्तुत किये जा रहे हैं। किसान काल सेन्टर के 1800-180-1551 निशुल्क टेलीफोन नम्बर के माध्यम से किसानों की समस्याओं का निवारण एवं जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

• “प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना”(केन्द्रीय हिस्सा:राज्य हिस्सा 50:50)

प्रदेश की मुख्य फसलों जैसे गेहूं, मक्की, धान, जौ को प्राकृतिक आपदाओं जैसे कि आग, आसमानी बिजली, सूखा, शुष्क अवधि, बाढ़, जल भराव, ओलावृष्टि, चक्रवात, तूफान, भूसंखलन, बादल फटना, कीट व रोगों आदि से हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति हेतु “प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना” में शामिल किया गया है। इसके अलावा अगर किसान कम वर्षा या प्रतिकूल मौसमी व्यवहार के कारण समय पर बुवाई नही˙ कर पाता है तो भी उसे बीमा आवरण मिलेगा। इसके साथ-2 इस योजना में कटाई के उपरांत खेत में सुखाने हेतु रखी फसल यदि 14 दिन के भीतर चक्रवाती बारिश, चक्रवात, ओलावृष्टि व बेमौसमी बारिश के कारण खराब हो जाती है तो क्षतिपूर्ति का आकंलन खेत स्तर पर ही किया जायेगा। प्रीमियम की दर किसानों के लिए बीमित राशि के अनुसार खरीफ मौसम के लिए 2 प्रतिशत व रबी मौसम के लिए 1.5 प्रतिशत रखी गई है। गैर ऋणी किसानों के लिए यह योजना स्वैच्छिक है। योजना के अन्तर्गत सभी ऋणी किसानों का वित्तिय संस्थाओं द्वारा स्वतः ही बीमा कर दिया जायेगा। यदि कोई ऋणी किसान इस योजना का लाभ नहीं उठाना चाहते हैं तो वह इस बारे में अपना घोषणा पत्र सम्बन्धित बैंक में साल में कभी भी जमा करवा सकता है। परन्तु यह घोषणा पत्र ऋणी किसान को सम्बन्धित बैंक शाखा को सम्बन्धित मौसम की बीमा करवाने की अन्तिम तिथियों से 7 दिन पूर्व तक देना होगा। इसके अतिरिक्त खरीफ मौसम में चुने हुऐ खंडो की सोलन, बिलासपुर, शिमला, सिरमौर कांगड़ा, कुल्लू व मंडी की टमाटर तथा सोलन, बिलासपुर, सिरमौर जिले की अदरक फसल तथा शिमला, किन्नौर, लाहौल-स्पिति, मंडी, कुल्लू व चम्बा की मटर फसल तथा चम्बा, कांगड़ा, किन्नौर, कुल्लू, लाहौल व स्पीती, मंडी, शिमला, सिरमौर व ऊना की आलू की फसल, कुल्लू व शिमला (ठियोग) की बन्दगोभी की फसल, शिमला (ठियोग) व लाहौल व स्पीती की फूलगोभी की फसल को भी मौसम आधारित फसल बीमा योजना में शामिल किया गया है। रबी मौसम में सोलन व मंडी की टमाटर, कांगड़ा की आलू, धर्मपुर सोलन की शिमला मिर्च व सिरमौर और कुल्लू की लहसुन की फसल को भी मौसम आधारित फसल बीमा योजना में शामिल किया गया है׀ किसानों के लिए प्रीमियम की दर बीमित राशि पर अधिकतम 5 प्रतिशत रखी है। यदि प्रीमियम दर 5 प्रतिशत से अधिक होती है तो वह राज्य व केन्द्र सरकार 50:50 के अनुपात में वहन करेगी। अब तक इन योजनाओं के अन्तर्गत खरीफ 2016 से अभी तक 3,13,515 किसानों को 57.21 करोड़ रूपये मुआवजे के तौर पर देकर लाभान्वित किया गया है। गैर ऋणी किसानों के लिए योजना स्वैच्छिक है जबकि ऋण लेने वाले किसान स्वतः इस योजना के अन्तर्गत आ जाते हैं सिवाये इस बात के कि यदि किसान ऋण देने वाली संस्था को स्वयं बाहर निकलने के लिए लिख कर देता है।

• राष्ट्रीय बांस मिशन :-

केंद्रीय सरकार की आर्थिक मामलों की समिति द्वारा 2018-19 में राष्ट्रीय सतत खेती मिशन के अन्तर्गत राष्ट्रीय बांस मिशन को देश में लागू करने की स्वीकृति दी गई है। इस मिशन का मुख्य उदेश्य बांस क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देना, संभावित क्षेत्रों में बांस की पैदावार बढ़ाने के लिए उन्नत किस्मों के साथ काम करना, प्राथमिक प्रोसैसिंग इकाइयों की स्थापना करना, बांस और बांस आधारित हस्तशिल्प के विपणन को बढ़ावा देना शामिल है। इस मिशन से कृषि उत्पादकता और आय बढे़गी, परिणाम स्वरूप छोटे व मध्यम वर्ग के किसानों एवम महिलाओं की आजीविका के अवसरों में वृद्धि होगी और साथ-साथ उद्योगों को भी गुणवता संपन्न सामग्री मिलेगी। इसके साथ-साथ ये मिशन जलवायु को सुदृढ़ बनाने और पर्यावरण संबधी लाभों में भी योगदान करेगा। प्रदेश में कृषि विभाग हि0 प्र0 को इस मिशन को लागू करने के लिए एंकरिंग विभाग (Anchoring Department) मनोनीत किया गया है और कृषि निदेशक हि0 प्र0 को राज्य मिशन निदेशक नियुक्त किया गया है। कृषि विभाग के अलावा वन विभाग, पंचायती राज विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, उद्योग विभाग, कृषि विश्वविद्यालय शामिल है। वर्ष 2020-21 में 104.78 लाख रूपये विभिन्न विभागों को इस योजना के अन्तर्गत दिए गए।

• सूचना एवं संचार प्रोद्योगिकी

सरकार द्वारा किसानों के लिए विभिन्न वेबपोर्टल, वेबसाइट और मोबाइल ऐप भी चलाए जा रहे हैं । किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार इन सेवाओं से कृषि सम्बन्धित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ-साथ भारत सरकार द्वारा किसानों के लिए एसएमएस किसान पोर्टल भी बनाया गया है। इस पोर्टल के द्वारा विभिन्न विभागों के पंजीकृत अधिकारी किसानों को मौसम सम्बन्धित, फसलों की सस्य क्रियाऐं, कीट व बिमारियों सम्बन्धित जानकारी इत्यादि को एसएमएस के द्वारा उनके मोबाइल पर उपलब्ध करवा रहे हैं।

• परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY)

हानिकारक रसायनों से रहित, स्थापित मानकों से अनुरुप प्राकृतिक आहार उत्पादन एवम् ट्रैसेबिल्टी की सुनिश्चिता सहित सामूहिक रुप से विपणन हेतू इस योजना को विभाग कार्यन्वित कर रहा है।

मुख्य रुप से इसके निम्न उदेश्य हैं:-

1. पर्यावरण संरक्षित तथा जलवायु सहनशील टिकाऊ कृषि पद्वतियों को बढ़ावा देना ताकि भूमि की उर्वरता को बनाये रख कर खेत में पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण द्वारा किसानों की मंहगे आदानों पर निर्भरता कम की जा सके।

2. टिकाऊ व समन्वित प्राकृतिक विधियों द्वारा खेती की लागत कम करना ताकि किसानों को प्रति इकाई क्षेत्र से अधिक आय प्राप्त कर सके व मानव उपयोग हेतु रसायन मुक्त तथा पोष्टिक भोजन का उत्पादन।

3. किसानों को कलस्टर तथा समूह के रूप में विकसित कर उनको उत्पादन, प्रंसस्करण तथा प्रगति हेतु सश्क्त करना तथा किसानों को पीजीएस तथा स्थापित मानकों, विधियों का प्रशिक्षण देना।

4. विपणन हेतु स्थानीय एवं राष्ट्रीय बाजार से सीधे जोड़कर किसानों को उद्यमी बनाना।

5. कृषि अवसंरचना निधि (एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फण्ड योजना 2021):-

भारत सरकार द्वारा एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फण्ड नामक नई योजना लाँच की गई है जो 2020-21 से 2029-30 तक देश में लागू की जाएगी। इस योजना के अन्तर्गत किसानों को 2 करोड़ रूपये तक ऋण 3 प्रतिशत ब्याज दर पर देने का प्रावधान है। कृषि अवसंरचना निधि के तहत किसान और संस्थाएं जैसे प्राथमिक कृषि साख समितियां, स्वयं सहायता समूह, किसान उत्पादक संगठन (एफ0पी0ओ0), एग्री उद्यमी, कृषि स्टार्टअप इत्यादि सरकार द्वारा राष्ट्रीयकृत बैंक वाणिज्यिक बैंको या किसी अन्य वित्तीय संस्थानों से ऋण का लाभ उठा सकेंगे। हिमाचल प्रदेश को योजना के अन्तर्गत 925 करोड़ रूपये (प्रयोगात्मक) आवंटित किए गये है। कृषि विभाग हि0 प्र0 को नोडल विभाग तथा निदेशक कृषि हि0 प्र0 को राज्य नोड़ल अधिकारी मनोनीत किया गया है। इसके अन्तर्गत परियोजना प्रबंधन इकाई (प्रोजेक्ट मैनेजमैंट यूनिट) की स्थापना हेतु कुल 75 लाख रूपये का बजट स्वीकृत किया गया है। इसके अन्तर्गत ऋण सुविधा विकासक्षम परियोजना (Viable Projects) के अन्तर्गत कटाई उपरांत प्रबन्धन गोदामों, भूमिगत कक्ष, ग्रेडिंग यूनिट, कोल्ड चेन तथा सामुदायिक किसान संसाधनो के लिए मध्यम से लंबी अवधि (अधिकतम 7 वर्ष) के लिए प्रदान की जाएगी।

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