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कृषि विभाग के महत्वपूर्ण कार्यक्रम

हिमाचल प्रदेष की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रदेष के 90 प्रतिषत लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं तथा 62 प्रतिषत लोग सीधे तौर पर कृषि पर निर्भर है। राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि व इससे जुड़े क्षेत्रों का लगभग 12.73 प्रतिषत योगदान है। 5.42 लाख हैक्टेयर भूमि पर काष्त होती है तथा औसतन जोत का आकार लगभग 0.5 हैक्टेयर है। प्रदेष में 87.95 प्रतिषत किसान सीमान्त तथा लघु वर्ग के हैं जिनके पास बोई जाने वाली भूमि का 54.18 प्रतिषत भाग है। 11.71 प्रतिषत किसान मध्यम श्रेणी से हैं। केवल 0.34 प्रतिषत किसान ही बड़े किसानों की श्रेणी में आते हैं। प्रदेश की कृषि जलवायु नकदी फसलों के उत्पादन हेतु अति उत्तम है।

• वर्श 2020-21 में सरकार द्वारा कृशि के विकास हेतु 668 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया है ।

राज्य प्रायोजित योजनाएं:

• ”फसल विविधिकरण प्रोत्साहन परियोजना“(JICA EAP)

प्रदेश में कृषि विविधिकरण को बढ़ावा देने हेतु ”321 करोड़ रूपये की हिमाचल प्रदेष फसल विविधिकरण प्रोत्साहन परियोजना“ जापान इन्टरनेषनल कोआपरेषन एजेंसी (JICA EAP)के सहयोग से जून, 2011 से लागू की गई है। इसमंे 266 करोड़ रुपये ऋण है जिसका 90 प्रतिषत भाग भारत सरकार द्वारा वहन किया जा रहा है और 55 करोड़ रुपये राज्य भाग है। इसके अन्तर्गत सिंचाई सुविधाएं, फार्म तक सड़क मार्ग, किसानों के समूह गठित कर सब्जी उत्पादन व विपणन हेतु तकनीकी जानकारी उपलब्ध करवाकर, परियोजना क्षेत्र में कार्यरत कृषि अधिकारियों को प्रषिक्षण आदि द्वारा सब्जी उत्पादन व फसल विविधिकरण को बढ़ावा देना शामिल है। परियोजना का संचालन हिमाचल प्रदेष एग्रीकल्चर डेवेल्पमेंन्ट सोसाईटी कर रही है जिसका गर्वनिंग बोर्ड है जिसके अध्यक्ष कृशि मंत्री हंै और एग्जीक्यूटिव कमेटी के अध्यक्ष सचिव ;कृशिद्ध है। इस परियोजना को प्रदेश के पाँच जिलों क्रमशः बिलासपुर, हमीरपुर, मंडी, कांगड़ा व ऊना में योजनाबद्ध तरीके से 7 वर्ष यानि मार्च, 2018 तक कार्यान्वित करना प्रस्तावित था परन्तु फसल विविधिकरण को कार्यान्वित करने हेतु इस परियोजना को वर्श 2020 तक कार्यान्वित किया जायेगा। इस परियोजना का मुख्यालय हमीरपुर में है। परियोजना के अन्तर्गत 210 लघु सिंचाई योजनाऐं, 147 सम्पर्क मार्ग, 37 कलैक्शन सैंटर बनाये जा रहे हैं तथा सब्जी उत्पादन को विशेष महत्व दिया जा रहा है। जाईका चरण-प्प् परियोजना की सैधान्तिक स्वीकृति जाईका टोकियो द्वारा अप्रैल 2020 में कर दी गई है जिसका क्रियान्वयन जाईका मिषन द्वारा थ्मंेपइपसपजल त्मचवतज के बाद आगामी 5-6 माह में किया जायेगा और इस सन्दर्भ मंे श्रप्ब्। ज्वालव द्वारा थ्मंेपइपसपजल ैजनकपमे का कार्य जुलाई, 2020 में षुरू कर दिया गया है।

• ”मुख्यमन्त्री नूतन पाॅलीहाउस परियोजना’’

प्रदेश सरकार ने वर्श 2019μ20 से 150 करोड़ रूपये की ”मुख्यमन्त्री नूतन पाॅलीहाउस परियोजना’’ प्रस्तावित की है, जिसके अन्तर्गत 5000 पाॅलीहाऊस बनाए जायेंगे। इस परियोजना को दो चरणों में कार्यान्वित किया जायेगा। प्रथम चरण की अवधि तीन वर्श (2020μ21 से 2022μ23) तक होगी और इस पर 78.57 करोड़ रु. खर्च किये गये जायेंगे। प्रथम चरण में 2522 पाॅली हाऊस बनाए जायेंगे। इस योजना में किसानों को पाॅली हाऊस व इसके अन्दर सूक्ष्म सिंचाई लगाने पर 85 प्रतिषत उपदान उपलब्ध है। इस परियोजना को नाबार्ड ने वित्तीय सहायता हेतु मार्च, 2020 में स्वीकृति दे दी है। इस वर्श इस परियोजना पर 20 करोड़ रूपये खर्च किये जायेंगे और 500 पाॅलीहाॅउस बनाये जायेंगे।

• ”मुख्यमन्त्री ग्रीनहाउस नवीकरण योजना’’

प्रदेश सरकार ने वर्श 2017μ18 से पाॅलीहाउस के अंतर्गत पाॅलीषीट को बदलने हेतु मुख्यमंत्री ग्रीनहाउस नवीकरण योजना आरम्भ की है। इस य¨जना के अंतर्गत 5 वर्ष पष्चात या प्राकृतिक आपदा से क्षतिग्रस्त होने पर पाॅलीषीट को बदलने हेतु प्रदेश सरकार द्वारा 70 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। वर्ष 2020μ21 के लिए इस य¨जना पर 1 कर¨ड़ रूपये का प्रावधान किया गया है।

• ‘‘ सूक्ष्म सिंचाई के माध्यम से कुषल सिंचाई योजना ’’

इस योजना का मुख्य उद्देष्य पानी के उचित उपयोग से राज्य में कृषि समुदाय को कुषल एवं आष्वासित सिंचाई सुविधा प्रदान करना है। प्रदेश में सूक्ष्म सिंचाई जैसे स्प्रिंकलर / ड्रिप को प्रोत्साहन दिया जा रहा है तथा इस परियोजना के माध्यम से 8,500 हैक्टेयर क्षेत्र को टपक/फुव्वारा सिंचाई प्रणाली के तहत् लाया जायेगा। इस योजना के अन्तर्गत सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली की स्थापना पर 80 प्रतिषत उपदान है। इस वर्श योजना के लिए 30 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है।

• ‘‘मुख्यमन्त्री किसान एवं खेतीहर मजद़ूर जीवन सुरक्षा योजना’’

कृषि मशीनरी के प्रयोग के दौरान किसानों तथा खेतीहर मज़दूरों के घायल होने अथवा उनकी मृत्यु होने की सूरत में सहायता प्रदान करने के उद्देष्य से सरकार द्वारा ‘मुख्यमन्त्री किसान एवं खेतीहर मजद़ूर जीवन सुरक्षा योजना’ नामक एक योजना आरम्भ की है। इसमें मृत्यु होने पर सहायता के रूप में 3.0 लाख रू0, स्थाई रूप से अपंग होने पर 1.0 लाख रू0 तथा आंशिक स्थाई अपंग होने पर प्रभावित को सहायता के रूप में 10,000 से 40,000 रू0 तक की सहायता प्रदान की जाएगी। इस वर्श के लिए इस योजना पर 40 लाख रू. का प्रावध्ाान रखा गया हैे।

• ‘‘मुख्यमंत्री खेत संरक्षण य¨जना’’

प्रदेश में बंदर¨ एंव जंगली जानवर¨ं से फसल¨ं क¨ काफी नुक्सान पहुंच रहा है। इसी के बचाव के लिए प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री ख्¨त संरक्षण य¨जना आरम्भ की है। इस योजना के अन्तर्गत कृशकों को सौर ऊर्जा चलित बाड़ लगाने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर 80 प्रतिषत व समूह आधारित बाड़ बन्दी के लिए 85 प्रतिषत अनुदान का प्रावधान है। बाड़ क¨ सौर उर्जा से संचारित किया जा रहा है। बाड़ में विद्युत प्रवाह से आवारा पषुअ¨ं, जंगली जानवर¨ं एवं बंदर¨ं क¨ दूर रखने में मदद मिलेगी। सरकार ने किसानों की माँग तथा सुझावों को देखते हुुऐ, (1) कांटेदार तार अथवा चेनलिंक बाड़ लगाने के लिये 50 प्रतिशत उपदान (2) क्ंपोजिट बाड़ लगाने के लिए 70 प्रतिशत उपदान का प्रावधान किया गया है। इस वर्श योजना के लिए 40 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया हैैं।

• ‘‘उत्तम चारा उत्पादन योजना’’

राज्य में चारे का उत्पादन बढ़ाने के लिये सरकार ने ‘‘उत्तम चारा उत्पादन योजना’’ आरम्भ की है। किसानों को उपदान दरों पर चारा घास के गुणवत्तायुक्त बीज, कलम तथा स्तरोन्नत चारा किस्मों की पौध उपलब्ध करवाई जा रही है। विभाग चरी, बाजरा, जई, बरसीम, मक्खन घास व चारा मक्की के बीज पर सभी किसानों को 50 प्रतिशत तक का अनुदान दे रही है। किसानों के लिये चारा काटने की मशीन (टोका मशीन) एक महत्त्वपूर्ण उपकरण है। सरकार अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और बीपीएल किसानों को चारा काटने की मशीन पर 50 प्रतिषत उपदान की सुविधा दे रही है। प्रदेश सरकार किसानों को अजोला घास की खेती करने को भी प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए सरकार किसानों को पिट बनाने के लिए 50 प्रतिशत उपदान दे रही है। इस योजना के अंतर्गत इस वर्ष 5.60 करोड़ रूपये खर्च किये जाएंगे।

• ‘‘उठाऊ सिंचाई योजना का निर्माण एवं बोरवैल योजना’’

प्रदेश के उन क्षेत्रों में जहाँ सिंचाई के लिए सतही जल स्त्रोत कृशि-जोतों से गहरे स्थानों में उपलब्ध है का उपयोग करने के लिए व्यक्तिगत स्तर की लघु/मध्यम उठाऊ सिंचाई योजनाऐं बनाई जाती है तथा जहाँ सिंचाई के लिए सतही जल स्त्रोत उपलब्ध नहीं है एवं भूमिगत पानी सम्भावित हो, ऐसे स्थानों पर विभाग किसानों को कृषि सिंचाई की पूर्ति के लिए व्यक्तिगत बोरवैल स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करता है। जो भी व्यक्ति अथवा किसान समूह, उठाऊ सिंचाई योजना का निर्माण एवं बोरवैल स्थापित करता है तो उन्हें 50 प्रतिशत उपदान दिया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत जल संग्रहण टैंक, सिप्रक्ंलर तथा पानी के पाईप भी उपलब्ध्ा करवाये जा रहे हैं। इस वर्श योजना के लिए 10 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है।

• ‘‘कृशि विपणन’’

मार्किटिंग की सुविधा हर किसान के घर-द्वार पहुंचे इसके लिए जगह-जगह छोटे सब्जी संग्रहण केन्द्र व मार्किट यार्ड बनाए जा रहे हैं। प्रदेष में कुल 10 मण्डिया तथा 50 उप मण्डिया कार्यरत है। वर्तमान सरकार मण्डियों व कोल्ड स्टोर के माध्यम से विपणन को बढ़ावा दे रही है। इस वर्ष मण्डियों पर 10 करोड़ रु. खर्च किये जाऐंगे। प्रदेष में अभी तक ई पोर्टल के अंतर्गत 19 मण्डिया कार्यरत है और 10 मण्डिया इस पोर्टल के माध्यम से जोड़ी जा रही है।

• ‘‘ प्राकृतिक खेती खुषहाल किसान योजना’’

प्रदेश सरकार ने वर्श 2018:19 से प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने हेतु प्राकृतिक खेती, खुषहाल किसान योजना आरम्भ की है। इसके अन्तर्गत फसल उत्पादन लागत को कम किया जा सकेगा। प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए निम्नलिखित पग उठाएं जा रहे हैः-

• कृषकों तथा कृषि, बागवानी तथा पशुपालन विभाग के विस्तार अधिकारियों को इस नई प्रणाली के बारे में अवगत कराने हेतु विस्तृत जागरूकता कार्यक्रम किए जा रहे हैं।

• विश्वविद्यालयों द्वारा इस के लिए च्ंबांहम व िच्तंबजपबमे तैयार किए जाएंगे ।

• रासायनिक कीटनाषकों के प्रयोग को हतोत्साहित किया जा रहा है।।

• देसी गाय की नस्ल सुधार व संवर्धन के लिए नीति बनाकर उसे कार्यान्वित किया जाऐगा ।

• गौषालाओं को पक्का करने व गोमूत्र और गोबर इकट्ठा करने के लिए गोेषाला बदलाव हेतु 80 प्रतिषत उपदान ( अधिकतम 8000 रूपये प्रति प्राकृतिक खेती किसान के लिये) दिए जा रहे हैं।

• प्राकृतिक खेती में प्रयोग होंने वाले आदान बनाने के लिए किसानों को ड्रमों पर 75 प्रतिषत उपदान (अधिकतम 750/- प्रति ड्रम एवं अधिकतम 3 ड्रम/प्राकृतिक खेती किसान परिवार के लिए) दिए जा रहे हैं।

• इस योजना के अन्र्तगत देसी गाय के गोबर व गौमूत्र और कुछ स्थानीय वनस्पतियों के घोल को रासायनिक कीटनाषकों के स्थान पर फसलों में छिड़काव हेतु प्रयोग में लिया जा रहा है।

• देसी गाय पर 50 प्रतिषत उपदान और अधिकतम 25000/- रूपये की उपदान का प्रावधान है तथा उसके परिवहन के लिए 5 हजार अतिरिक्त दिए जा रहे हैं।

• प्राकृतिक खेती में काम आने वाले आदानों की आपूर्ति हेतु प्रत्येक गाँव में प्राकृतिक खेती संसाधन भण्डार खोलने के लिये 10,000/- रूपये तक की सहायता।

• योजना के अन्र्तगत कृषकों को आवष्यक प्रषिक्षण व उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

प्रदेश के 9.61 लाख किसान परिवारों को चरणवद्ध प्रणाली से 2018 से 2022 तक समस्त किसान/ बागवान/चाय बागवान इस विधि से जोड़ दिये जाएगें। वर्श 2020-21 में 50000 अतिरिक्त किसानों को इसके अन्तर्गत लाने का लक्ष्य रखा गया है और 20000 हैक्टेयर क्षेत्र को प्राकृतिक खेती के अधीन लाया जायेगा। इसके अतिरिक्त इस वर्श 1 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रेरित किया जायेगा।

• ‘‘जल से कृषि को बल योजना“

इस योजना के अन्तर्गत प्रदेष में उपयुक्त स्थलों पर चैकडैम एवं तालाबों का निर्माण किया जायेगा उनमें एकत्रित जल को किसान व्यक्तिगत लघु उठाऊ सिंचाई योजनाऐं या बहाव सिंचाई योजनाऐं (जैसा अपेक्षित हो) बनाकर सिंचाई के लिए पानी उपयोग कर सकते हैं। इस योजना के अंतर्गत 5 वर्र्शोंें के लिए 250 करोड़ रूपये तथा इस वर्ष 25.00 करोड़ रूपये खर्च किये जाएंगे। योजना के अन्तर्गत सामुदायिक लघु जल संचयन योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए षत प्रतिषत व्यय सरकार द्वारा वहन किया जायेगा।

• ‘‘प्रवाह सिंचाई योजना“

इस योजना के अन्तर्गत प्रदेष में कूहलों के स्रोतों का नवीनीकरण तथा सामुदायिक क्षेत्रांे में कूहलों को सुदृढ करने का कार्य किया जा रहा है। योजना के अन्तर्गत सभी सामुदायिक कार्यों के लिए षत प्रतिषत व्यय सरकार द्वारा वहन किया जायेगा। योजना के अन्तर्गत व्यकितगत स्तर पर बोरवैल और उथले कुओं के निर्माण पर 50 प्रतिषत की सहायता का प्रावधान है। योजना के अन्तर्गत 5 वर्र्शोंें के लिए 150 करोड़ रूपये तथा इस वर्ष 15.00 करोड़ रूपये खर्च किये जाएंगे।

• ‘‘राज्य कृशि यंत्रीकरण कार्यक्रम“

प्रदेष में कृशि अभियान्त्रिकी को बढ़ावा देने तथा पहाड़ी खेती के मषीनीकरण हेतु राज्य सरकार द्वारा वर्श 2018-19 से एक नई योजना ‘‘राज्य कृशि यंत्रीकरण कार्यक्रम’’ लागू की गई है। विभाग द्वारा इस योजना के अन्तर्गत प्रदेष के किसानों को बड़े स्तर पर ट्रैक्टर, पावर टिलर व पावर वीडर इत्यादि उपदान पर उपलब्ध करवाये जा रहे हैं। योजना के अन्तर्गत वित्त वर्श 2020-21 में प्रदेष के किसानों को ट्रैक्टर 8-20 हार्स पावर 50 प्रतिषत उपदान अधिकतम सीमा 2.25 लाख रुपये, 20-40 हार्स पावर 50 प्रतिषत उपदान अधिकतम सीमा 3.00 लाख रुपये उपदान के रुप में उपलब्ध कराये जा रहे हैं। इसी तरह 8 हार्स पावर या इससे अधिक क्षमता के पावर टिलर पर 50 प्रतिषत उपदान अधिकतम सीमा 85 हजार रुपये तथा पावर वीडर पर 50 प्रतिषत उपदान अधिकतम सीमा 25 हजार रुपये उपदान के रुप में उपलब्ध कराये जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेष के बेरोजगार युवाओं व सहकारी सभाओं को कृशि उपकरण सुविधा केन्द्र ;ब्नेजवउ भ्पतपदह ब्मदजतमद्ध स्थापित करने हेतू 40 प्रतिषत उपदान का प्रावधान रखा गया है ताकि प्रदेष के गरीब किसान व वागवान इन केन्द्रों से किराये पर उपकरण हासिल कर सकें। इस योजना के क्रियान्वयन हेतू प्रदेष सरकार द्वारा वित्त वर्श 2020-21 हेतू 20 करोड़ रुपये का वजट प्रावधान रखा गया है।

• कृशि कोशः-

कृशक उत्पादक संगठन किसानों, बागवानों, दुग्ध उत्पादकों, मछुआरों आदि प्राथमिक उत्पादकों के निकाय हैं। किसान व बागवान संसाधन जुटाने में प्रायः असफल रहते हैं। उन्हें फसल बुवाई से कटाई तक तथा कटाई के बाद गे्रडिंग और पैकेजिंग मषीनों, परिवहन, भण्डारण, गोदाम और पैक हाऊस जैसे बुनियादी ढाँचे तथा अन्य आदानों की आवष्यकता होती है जिस के लिए दीर्घकालिक पूंजी की जरूरत रहती है। इसको ध्यान में रखते हुए प्रदेष सरकार ने इस वर्श 20 करोड़ रुपये का कृशि कोश बनाने का प्रावधान किया है जिससे कृशक उत्पादक संगठन किसानों को Seed Money, बैंक ऋण पर उपदान और के्रडिट गारंटी कवर प्रदान किया जाएगा। इस के लिए सरकार द्वारा विस्तृत दिषा -निर्देष तैयार किए जा रहे हैं। 2022 तक 75 हजार से 90 हजार किसानों को कृशि कोश का लाभ मिलने की संभावना है।

• ”कृशि से संपन्न्ाता योजना“

Institure of Himalayan Bio Technology(IHBT) पालमपुर द्वारा हींग की एक नई प्रजाती की पहचान की गई है जो कि चम्बा, लाहौल-स्पिति और किन्न्ाौर जिलों की उंचाई वाले क्षेत्रों में उगाई जा सकती है। इसी तरह कुछ क्षेत्रों में केसर की खेती के लिए अनुकूल जलवायु एवं वातावरण पाया गया है। इन दोनों की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रदेष सरकार ने इस वर्श से कृशि संपन्न्ाता योजना प्रस्तावित की है। इस योजना को क्रियान्वित करने हेतु विभाग द्वारा विस्तृत कार्य योजना तैयार कर ली गई है। इसके अन्तर्गत 6 जून, 2020 को प्भ्ठज् के साथ एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित कर लिया गया है। योजना के अन्तर्गत हींग व केसर की खेती की षुरूआत करना व प्रगतिषील किसानों के खेतों में हींग व केसर की फसलों के प्रदर्षन लगाना षामिल है। इसके साथ-साथ अधिकारियों व किसानों को इस खेती विधि की व्यापक जानकारी देने के लिए प्रषिक्षणों का प्रावधान भी है।

• कृशि उत्पादन संरक्षण योजना (एन्टी हेल नेटस) 2020-21

इस योजना के अन्र्तगत फसलों को ओलावृश्टि से बचाने हेतू राज्य सरकार द्वारा किसानो को एन्टी हेल नेटस की खरीद पर 80 प्रतिषत अनुदान उपलब्ध करवाया जायेगा। प्रदेष के सभी सब्जी उत्पादक किसानों को उनकी फसलों को प्राकृति आपदा से बचाने के लिए एन्टी हैल नैटस उपलब्ध करवाये जाने है ताकि फसलों को ओलावृश्टि, आवारा पषुअ¨ं व बन्दरों से बचाया जा सके, प्रदेष के सभी किसानों को एन्टी हैल नैटस खरीदने के लिए सरकार द्वारा 10 करोड रूपये का वित्तिय प्रावधान किया गया है तथा पात्र किसानों को 28 रूपये प्रति वर्ग मीटर की दर से अनुदान उपलब्ध करवाया जायेगा, जिसमें अधिकतम 5 हजार वर्ग मीटर के लिए पात्र किसान इस योजना के अन्तर्गत लाभ ले सकतें हैं।

• चाय व काॅफी की खेती

चाय व काॅफी महत्वपूर्ण पेय है जो कि पूरे संसार में प्रचलित है। प्रदेष में चाय की खेती जिला कांगड़ा के धौलाधार बोटेनिकल गाडर्न वर्श 1849 से की जा रही है। प्रदेष में चाय की खेती के अन्तर्गत 2315 हैक्टेयर भूमि है। विभाग के तकनीकी अधिकारी द्वारा कृशकों के लिए निम्न योजनाएं कायान्वित की जा रही है।

1. कृशको को सुधरी किस्मों के पौधों का वितरण

2. प्रर्दषन प्लाॅटों की योजना

3. प्रर्दषन -भ्रमण

• ‘‘खाद पर उपदान’’

राज्य सरकार मिश्रित खादों जैसे डी.ए.पी.18:46:0, इफको-एन.पी.के.12:32:16 और 10:26:26 व आर.सी.एफ.-एन.पी.के.15:15:15 की कीमत पर 1000 रूपये प्रति मिट्र्कि टन उपदान दे रही है। इस योजना के अन्तर्गत 1.79 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है।

• ‘‘अच्छी गुणवत्तायुक्त बीजों का गुणन एवं उनका वितरण’’

विभाग के अपने 36 बीज गुणन प्रक्षेत्र है जहाॅं पर कि रबी और खरीफ के फसलों का आधार बीज तैयार किया जाता है। इन बीज फार्मों में अनाज, दालों और सब्जियों का लगभग 3500 से 4000 क्विंटल बीज प्रतिवर्ष तैयार किया जाता है। इसके अतिरिक्त विभाग द्वारा विभिन्न फसलों के 90,000 क्विंटल प्रमाणित बीज राज्य के किसानों को वितरित किये जाते हैं।

• ‘‘पौध संरक्षण’’

विभाग इस कार्यक्रम के अन्तर्गत फसलों में लगने वाली बिमारियों में तथा कीटों के प्रकोप की स्थिति पर लगातार निगरानी रखता है। षिमला में प्रादेषिक कीटनाषक परीक्षण प्रयोगषाला स्थापित की गई है जो कि अपनी क्षमता के अनुसार प्रति वर्ष 300-400 नमूनों की जांच करती है। इसके अतिरिक्त जैविक विधि से कीट नियन्त्रण करने के उदेष्य से एक जैव नियंत्रक प्रयोगषाला तथा जैविक कीटनाषक प्रयोगषाला पालमपुर में स्थापित की गई है जहां संरक्षण कीट स्थिति वृद्धि, पालन और जैव एजेंटों और प्रसार कर्मियों और किसानों के लिए परीक्षण दिया जा रहा है तथा जैव नियन्त्रक एजेंट तैयार किए जाते हैं।

• ‘‘गुणवत्ता नियंत्रण’’

इस योजना के तहत बीज, खाद और कीटनाषकों पर विभिन्न अधिनियमों के अल्तर्गत गुणवता नियन्त्रण का क्रियान्वयन सुनिष्चित किया जाता है। इसके लिए प्रदेष में गुणवत्ता नियंत्रण अधिकारियों को अधिसूचित किया गया है। विभाग के द्वारा तीन उर्वरक प्रयोगषालाएं हमीरपुर, सुन्दरनगर व षिमला में और तीन बीज परीक्षण प्रयोगषालाएं सोलन, पालमपुर और मण्डी में तथा कीटनाषक प्रयोगषाला षिमला में कार्यरत है। इनमें 2000 उर्वरक के नमूने, 300 कीटनाषक और 700 बीज के नमूने का प्रतिवर्श का विष्लेशण किया जा रहा है।

केन्द्र प्रायोजित योजनाएं:

• ‘‘प्रधानमन्त्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान योजना“ (पी.एम.कुसुम योजना 50:35 या 50:30)

सरकार ने किसानों को आष्वस्त सिंचाई प्रदान करने हेतू विषेषकर दूरस्थ इलाकों में जहां बिजली की निरतंर आपूर्ति रहे वहां जल उठाने के लिए प्रधानमन्त्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान योजना“ (पी.एम.कुसुम योजना) नामक योजना आरम्भ की है, ताकि फसलों के उत्पादन व उत्पादकता में वृद्धि हो सके। इस योजना के अन्तर्गत प्रदेष में सौर पम्पों से खेती-सिंचाई के लिए जल उठाने के लिए आवष्यक अधोसंरचना स्थापित करना प्रस्तावित है। योजना के अन्तर्गत सौर पम्पों से सिंचाई हेतु व्यक्तिगत व सामुदायिक स्तर पर सभी वर्ग के किसानों के लिए पंपिंग मषीनरी लगाने हेतु 85 प्रतिषत की सहायता का प्रावधान है। इस वर्श योजना के लिए अब तक 5.00 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है। इस वर्श 1000 सौर पम्प लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

• ”राष्ट्रीय कृषि विकास योजना“ (केन्द्रीय हिस्सारूराज्य हिस्सा 90:10)

कृषि व सम्बद्ध क्षेत्रों में 4 प्रतिषत की विकास दर प्राप्त करने के लिये ”राष्ट्रीय कृषि विकास योजना“ लागू की गई है। इस योजना के मुख्य उद्देष्य हैः राज्यों को कृषि व सम्बद्ध क्षेत्रों में निवेष हेतु प्रोत्साहित करना, कृषि कार्यक्रमों की योजना बनाने व लागू करने की प्रक्रिया में राज्योें को छूट देना, कृषि जलवायु, तकनीक व प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता के अनुसार जिले व राज्यों की कृषि योजनाओं को बनाना, यह भी सुनिष्चित करना कि ये योजनायें स्थानीय जरूरतों/ फसलों/ प्राथमिकताओं को देखकर बनाई गई हंै, कृषि व सम्बद्ध क्षेत्रों से किसानोें की आय को बढ़ाना, इन क्षेत्रों के उत्पादन तथा उत्पादकता में भरपूर परिवर्तन आदि। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रदेश में पहली बार ”जिला कृषि योजनायें“ तैयार की गई है तथा साथ में राज्य कृषि योजना भी बनाई गई हैं ताकि योजनाबद्ध तरीके से कृषि का समग्र विकास किया जा सके। कृषि विकास की प्राथमिकताऐं भी निर्धारित की गई हैं। इस कार्य में कृषि विभाग के अलावा बागवानी, पशुपालन व मत्स्य विभाग भी शामिल हैं।

• ”राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अभियान“ (केन्द्रीय हिस्सारूराज्य हिस्सा 90:10)

प्रदेश में धान, मक्की, दालों, गेहूॅं और पोशक अनाजों (Nutri-cereals) का उत्पादन व उत्पादकता बढ़ाने के लिए ”राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अभियान“ आरम्भ किया गया है। इस अभियान के अंतर्गत धान, गेहूँ, दालों, मक्की व पोशक अनाजों का उत्पादन बढा़ने हेतू सहायता दी जा रही है। इस में धान के लिए कांगड़ा, मंडी व गेहूँ के लिए 11 जिले (षिमला को छोड़करद्ध षामिल है। मक्की के लिए 9 जिले ( षिमला, किन्नौर व लाहौल को छोड़करद्ध षामिल है। षिमला जिले कों क्लस्टर प्रर्दषन की उपलब्धता न ह¨ने के कारण गेंहू व मक्की के अंतर्गत षामिल नहीं किया गया है। इसके अलावा माष, चना, मटर, मसूर व मूंग की दलहनी फसलों के लिए सभी जिले षामिल हैं। पोशक अनाजों (ज्वार, बाजरा, कोदोमिल्ट, प्रोसोमिल्ट, फोक्सटेलमिल्ट {कंगनी}, लिटलमिल्ट {सावण}, फिंगरमिल्ट {रागी,मंडुआ}, बार्नर्याडमिल्ट ) के लिए सभी जिलें षामिल है। इसके अन्तर्गत क्लस्टर प्रदर्षन क्षेत्र, मषीनरी, बीज, सूक्ष्म तत्व, पौध संरक्षण इत्यादि पर सहायता दी जा रही है ताकि धान, गेहूँ, दालों, मक्की व पोशक अनाजों की पैदावार बढ़ाई जा सके। इस कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2020-21 में 12.48 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है। इसमें धान के लिए 0.79 करोड़ रूपये, गेहूँ के लिए 5.45 करोड़ रूपये, मक्की के लिए 2.63 करोड़ रूपये, दालों के लिए 1.34 करोड़ रूपये व पोशक अनाजों के लिए 0.75 करोड़ रूपये खर्च करने का अनुमानित प्रावधान है।

• ”राज्य प्रसार कार्यक्रमांे में प्रसार सुधार हेतु समर्थन /आत्मा कार्यक्रम“ (केन्द्रीय हिस्सारूराज्य हिस्सा 90:10)

कृषि की नवीनतम तकनीक के प्रसार व प्रचार हेतु सभी जिलों में ‘‘आत्मा कार्यक्रम’’ शुरु किया गया है। कृषि विभाग के अलावा किसानों से जुड़े दूसरे विभाग जैसे उद्यान, पषुपालन, मत्स्य व कृषि/बागवानी विष्वविद्यालय भी इस कार्यक्रम में सहयोगी हंै। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत खंड स्तर पर किसान समूह, स्वंय सहायता समूह व किसान संगठन गठित किये गये हैं। इस योजना के अन्तर्गत हर वर्ष सभी जिलों की कार्य योजनाऐं बनाई जाती है तथा कार्य योजनाओं को चलाने के लिये धन उपलब्ध करवाया जा रहा है। ब्लाक स्तर पर कृषक सलाहकार समिति बनाई जाती है। उत्कृश्ट किसानों में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने व उत्पादन बढ़ाने हेतु विभिन्न स्तरों पर उत्कृष्ट किसानों को पुरस्कार भी दिए जा रहे हैं। इस योजना के अंतर्गत इस वर्ष 19.66 करोड़ रूपये खर्च किये जाएंगे।

• ”राष्ट्रीय सतत खेती मिषन“ (केन्द्रीय हिस्सारूराज्य हिस्सा 90:10)

प्राकृतिक संसाधनो के संरक्षण के साथ-साथ बारानी क्षेन्न्ाों का विकास प्रदेश में अन्न उत्पादन की बढती हुई मांग को पूरा करने की एक कुंजी है इसके लिए केन्द्र सरकार ने वर्श 2014-15 से कृषि उत्पादकता को विषेशतया बारानी क्षेन्न्ाों में बढ़ाने के लिए ”टिकाऊ खेती हेतु राष्ट्रीय मिषन“ आरम्भ किया है। इस अभियान के अंतर्गत बारानी क्षेन्न्ाों का विकास, मुल्यसंवर्धन एंव कृषि विकास गतिविधियां, जलवायु प्रबन्धन व टिकाउ कृषि जैसे उप कार्यक्रम षामिल है। वर्श 2020-21 में बारानी क्षेत्रों के विकास हेतु 889.44 लाख रूपये की योजना भारत सरकार से स्वीकृति हुई है जिसके अन्तर्गत 3712 हैक्टेयर बारानी क्षेत्रों का विकास किया जायेगा।

• ”मिट्टी परीक्षण“ (केन्द्रीय हिस्सारूराज्य हिस्सा 90:10)

कृषि उत्पादन बढ़ाने व भूमि की उपयोगिता जानने हेतु ”मिट्टी परीक्षण“ का बहुत महत्व है। विभाग निःशुल्क मिट््टी परीक्षण सुविधा किसानों को उपलब्ध करा रहा है ताकि किसान अपने खेतों की मिट्टी की जांच की सिफारिशों को अपनाकर कृषि उत्पादन में वृद्वि कर सके। इसके लिए प्रदेश में 9 स्वचालित मिट्टी परीक्षण प्रयोगषालाओं, 11 अचल मिट्टी परीक्षण प्रयोगषालाओं व 47 मिनी प्रयोगषालाओं की सुविधा उपलब्ध है। मिट्टी स्वास्थ्य जांच को सर्विस गारन्टी अधिनियम के अन्तर्गत लाया गया है ताकि किसानों को तय अवधि में रिपोर्ट मिल सके। भारत सरकार ने किसानों को मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड वितरित करने हेतु योजना आरम्भ की है जिसके अन्तर्गत ळच्ै के आधार पर किसानों के £ेतों से मिट्टी के नमूने लिए जा रहे हैें तथा उनका परीक्षण सभी पोषक तत्वों के लिए विभाग की मिट्टी परीक्षण प्रयोगषालाओं में किया जा रहा है।

• प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (केन्द्रीय हिस्सारूराज्य हिस्सा 90:10)

भारत सरकार ने वर्ष 2015 से खेत में पानी की पहुँच का सही उपयोग बढाने के लिए और सुनिष्चित सिंचाई के तहत कृषि क्षेत्र का विस्तार करने के उद्देष्य से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना को आरंभ किया है। इस योजना में प्रति बूंद अधिक फसल का उत्पादन करके गा्रमीण क्षेत्र में सम्ृद्धि लाने का लक्ष्य हैं। इस योजना के अन्तर्गत सिंचाई में निवेष में एकरूपता लाना, ‘हर खेत कों पानी’ के तहत कृषि योग्य क्षेत्र का विस्तार करने के लिए, खेत¨ं में ही जल क¨ इस्तेमाल करने की दक्षता क¨ बढ़ाना ताकि पानी के अपव्यय क¨ कम किया जा सके, सही सिंचाई और पानी क¨ बचाने की तकनीक क¨ अपनाना ( हर बूंद अधिक फसल ) आदि इस य¨जना के मुख्य उद्देष्य हैं।

• ‘‘कृषि सूचना’’(100%केन्द्रीय हिस्साद्ध)

जन संपर्क के माध्यमों से कृषि प्रसार एवं विस्तार हेतु एक अन्य योजना भी शुरु की गई है। इसके अन्तर्गत दूरदर्षन व रेडियो द्वारा कृषि प्रसार करना है। वर्तमान में दूरदर्षन द्वारा प्रसारित ”कृषि दर्षन“ कार्यक्रम के अलावा क्षेत्रीय व राष्ट्रीय कृषि कार्यक्रम पर जोर दे रहा है। आकाषवाणी द्वारा एफ. एम. ट्रांसमीटरों से क्षेत्र विषेष हेतु सप्ताह में 6 दिन 30 मिनट के कार्यक्रम प्रस्तुत किये जा रहे हैं। किसान काल सेैन्टर के 1800-180-1551 निःषुल्क टेलीफोन नम्बर के माध्यम से किसानों की समस्याओं का निवारण एवं जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

• ”प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’’(केन्द्रीय हिस्सा:राज्य हिस्सा 50:50)

प्रदेश की मुख्य फसलों जैसे गेहूॅं, मक्की, धान, जौ को प्राकृतिक आपदाओं जैसे कि आग, आसमानी बिजली, सूखा, षुष्क अवधि, बाढ़, जल भराव, ओलावृष्टि, चक्रवात, तूफान, भूसंखलन, बादल फटना, कीट व रोगों आदि से हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति हेतु ”प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’’ में शामिल किया गया है। इसके अलावा अगर किसान कम वर्षा या प्रतिकूल म©समी व्यवहार के कारण समय पर बुवाई नही˙ कर पाता है त¨ भी उसे बीमा आवरण मिलेगा। इसके साथ-2 इस योजना में कटाई के उपरांत खेत में सुखाने हेतु रखी फसल यदि 14 दिन के भीतर चक्रवाती बारिष, चक्रवात, ओलावृश्टि व बेम©समी बारिष के कारण खराब ह¨ जाती है त¨ क्षतिपूर्ति का आकंलन खेत स्तर पर ही किया जायेगा। प्रीमियम की दर किसानों के लिए बीमित राषि के अनुसार खरीफ मौसम के लिए 2 प्रतिषत व रबी मौसम के लिए 1.5 प्रतिषत रखी गई है। गैर ऋणी किसानों के लिए यह योजना स्वैच्छिक है। योजना के अन्तर्गत सभी ऋणी किसानों का वित्तिय संस्थाओं द्वारा स्वतः ही बीमा कर दिया जायेगा। यदि कोई ऋणी किसान इस योजना का लाभ नहीं उठाना चाहते हैं तो वह इस बारे में अपना घोषणा पत्र सम्बन्धित बैंक मंे साल में कभी भी जमा करवा सकता है। परन्तु यह घोषणा पत्र ऋणी किसान को सम्बन्धित बैंक षाखा को सम्बन्धित मौसम की बीमा करवाने की अन्तिम तिथियों से 7 दिन पूर्व तक देना होगा। इसके अतिरिक्त खरीफ मौसम में चुने हुऐ खंडो की सोलन, बिलासपुर, षिमला, सिरमौर कांगड़ा, कुल्लू व मंडी की टमाटर तथा सोलन, बिलासपुर, सिरमौर जिले की अदरक फसल तथा षिमला, किन्नौर, लाहौल-स्पिति, मंडी, कुल्लू व चम्बा की मटर फसल तथा चम्बा, कांगड़ा, किन्नौर, कुल्लू, लाहौल व स्पीती, मंडी, षिमला, सिरमौर व ऊना की आलू की फसल, कुल्लू व षिमला (ठियोग) की बन्दगोभी की फसल, षिमला (ठियोग) व लाहौल व स्पीती की फूलगोभी की फसल को भी मौसम आधारित फसल बीमा योजना में शामिल किया गया है। रवी मौसम में सोलन व मंडी की टमाटर, कांगड़ा की आलू, धर्मपुर सोलन की षिमला मिर्च व सिरमौर और कुल्लू की लहसुन की फसल को भी मौसम आधारित फसल बीमा योजना में शामिल किया गया है׀ किसानों के लिए प्रीमियम की दर बीमित राषी पर अध्ािकतम 5 प्रतिषत रखी है। यदि प्रीमियम दर 5 प्रतिषत से अधिक होती है तो वह राज्य व केन्द्र सरकार 50ः50 के अनुपात में वहन करेगी। अब तक इन योजनाओं के अंर्तगत ख्रीफ 2016 से 2019-20 (अन्तरिम) 2,22,230 किसानोें को 43.78 करोड़ रूपये मुआवजे के तौर पर देकर लाभान्वित किया गया है।

• राश्ट्रीय बांस मिषनः-

केंद्रीय सरकार की आर्थिक मामलांे की समिति द्वारा 2018-19 में राश्ट्रीय सतत खेती मिषन के अन्र्तगत राश्ट्रीय बांस मिषन को देष मेें लागू करने की स्वीकृति दी गई है। इस मिषन का मुख्य उदेष्य बांस क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देना, संभावित क्षेत्रों में बांस की पैदावार बढ़ाने के लिए उन्नत किस्मों के साथ काम करना, प्राथमिक प्रोसैसिंग इकाइयों की स्थापना करना, बांस और बांस आधारित हस्तषिल्प के विपणन को बढ़ावा देना षामिल है। इस मिषन से कृशि उत्पादकता और आय बढे़गी, परिणाम स्वरूप छोटे व मध्यम वर्ग के किसानों एवम महिलाओं की आजीविका के अवसरों में वृद्धि होगी और साथ-साथ उद्योगों को भी गुणवता संपन्न सामग्री मिलेगी। इसके साथ-साथ ये मिषन जलवायु को सुदृढ़ बनाने और पर्यावरण संबधी लाभों में भी योगदान करेगा। प्रदेष में कृशि विभाग हि0 प्र0 को इस मिषन को लागू करने के लिए एंकरिंग विभाग (Anchoging Department) मनोनीत किया गया है और कृशि निदेषक हि0 प्र0 को राज्य मिषन निदेषक नियुक्त किया गया है। कृशि विभाग के अलावा वन विभाग, पंचायती राज विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, उद्योग विभाग, कृशि विष्वविद्यालय षामिल है। वर्श 2019-20 में 3.32 करोड़ रूपये विभिन्न विभागों को इस योजना के अंर्तगत दिए गए।

• सूचना एवं संचार प्रोद्योगिकी

सरकार द्वारा किसानों के लिए विभिन्न वेबपोर्टल, वेबसाइट और मोबाइल ऐप भी चलाए जा रहे हंै। किसान अपनी आवष्यकता के अनुसार इन सेवाओं से कृशि सम्बन्ध्ाित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ-साथ भारत सरकार द्वारा किसानों के लिए एसएमएस किसान पोर्टल भी बनाया गया है। इस पोर्टल के द्वारा विभिन्न विभागों के पंजीकृत अध्ािकारी किसानों को मौसम सम्बन्ध्ाित, फसलों कीे सस्य क्रियाऐं, कीट व बिमारियों सम्बन्ध्ाित जानकारी इत्यादि को एसएमएस के द्वारा उनके मोबाइल पर उप्लब्ध्ा करवा रहे हैं।

• परम्परागत कृशि विकास योजना(PKVY)

हानिकारक रसायनों से रहित, स्थापित मानकों से अनुरुप प्राकृतिक आहार उत्पादन एवम् ट्रैसेबिल्टी की सुनिष्चितता सहित सामूहिक रुप से विपणन हेतू इस योजना को विभाग कार्यन्वित कर रहा है।

• मुख्य रुप से इसके निम्न उदेष्य हैंः-

1. पर्यावरण संरक्षित तथा जलवायु सहनषील टिकाऊ कृशि पद्वतियों को बढ़ावा देना ताकि भूमि की उर्वरता को बनाये रख कर खेत में पोशक तत्वों के पुर्नचक्रण द्वारा किसानों की मंहगे आदानों पर निर्भरता कम की जा सके।

2. टिकाऊ व समन्वित प्राकृतिक विधियों द्वारा खेती की लागत कम करना ताकि किसानों को प्रति इकाई क्षेत्र से अधिक आय प्राप्त कर सके व मानव उपयोग हेतु रसायन मुक्त तथा पोश्टिक भोजन का उत्पादन।

3. किसानों को कलस्टर तथा समूह के रूप में विकसित कर उनको उत्पादन, प्रंसस्करण तथा प्रगति हेतु सषस्त करना तथा किसानों को पीजीएस तथा स्थापित मानकों, विधियों का प्रशिक्षण देना।

4. विपणन हेतु स्थानीय एवं राश्ट्रीय बाजार से सीधे जोड़कर किसानों को उद्यमी बनाना।

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